सामुदायिक वनाधिकार विकास योजना

वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक प्रवृत्ति के वनाधिकार पत्र जारी किए जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा व्यक्तिगत प्रवृत्ति के वनाधिकार पत्र प्राप्त करने वाले लाभार्थियों के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई आकर इन्हें विभिन्न प्रकार के लाभ देने के प्रयास किए जा रहे हैं, परन्तु अभी तक सामुदायिक प्रवृत्ति के वनाधिकार पत्र जारी होने के बावजूद ऐसे क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यों को कराने हेतु कोई पृथक योजना नहीं है।

राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में तद्नुसार यह निर्णय लिया गया है कि जिन क्षेत्रों हेतु सामुदायिक प्रवृत्ति के वनाधिकार पत्र जारी हो रहे हैं उन क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां सम्पादित करने के लिए एक नई योजना चलाई जाए। इस योजना का नाम सामुदायिक वन अधिकार विकास योजना होगा।

इस योजना के अन्तर्गत उन क्षेत्रों में जिनके लिए सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी किए गए है, में जल संग्रहण वृक्षारोपण फलदार पौधे लगाने मछली पालन, चारागाह विकास, सामुदायिक भवन रोड प्रोसेसिंग सेंटर इत्यादि जैसे काम कराने अतिरिक्त इन क्षेत्रों पर आधारित जनजाति सामुदायिक केन्द्रों को विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण एवं उपकरण इत्यादि प्रदान करने हेतु राशि स्वीकृत की जा सकेगी।

जिन जिलों में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी / उपायुका कार्य कर रहे हैं स्वीकृति हेतु प्रस्ताव इन अधिकारियों द्वारा जिला कलेक्टर को प्रस्तुत किए जाएंगे एवं बाकी के जिलों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद प्राप्त प्रस्तावों को जिला कलेक्टर स्वीकृति हेतु प्रस्तुत करेंगे।

इन कार्यों के लिए आवश्यक स्वीकृतियां जिला कलक्टर द्वारा जारी की जाएगी। सामान्यतः किसी भी एक ऐसे क्षेत्र जिनके लिए सामुदायिक वन अधिकार पत्र जारी हुआ हो. हेतु रू. 10 लाख से अधिक की स्वीकृतियां जारी नहीं की जाएगी एवं इससे अधिक धन राशि की आवश्यकता होने पर जिला कलक्टर द्वारा प्रस्ताव आयुक्त, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग को स्वीकृति हेतु प्रेषित किए जाएंगे, जो प्रस्ताव की उपयोगिता के आधार पर इसे राज्य सरकार को आवश्यक अनुमोदन हेतु प्रेषित करेंगे।

इस योजना के तहत व्यक्तिगत प्रवृत्ति के कार्यों को नहीं कराया जा सकेगा तथा सामुदायिक प्रवृति के कार्यों का सम्पादन मुख्यतः राजकीय विभागों / एजेन्सीयों जैसे वन विभाग ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग भू-संरक्षण एवं जल संग्रहण विभाग, उद्यानिकी विभाग स्वच्छ परियोजना इत्यादि से सम्पादित कराया जाएगा।

इस योजना के अन्तर्गत कराए जाने वाले कार्यों हेतु जिलों को राशि आयुक्त जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा आवश्यकतानुरूप उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यकारी विभागों/ एजेन्सियों द्वारा उपलब्ध राशि के व्यय के संबंध में मासिक रिपोर्ट जिला कलेक्टर को उपलब्ध करायी जाएगी। योजना के तहत जिला कलक्टर कार्यकारी विभागों/एजेन्सियों से उपयोगिता/ पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त कर आयुक्त जनजाति क्षेत्रिय विकास विभाग को प्रेषित करेंगे।

राज्य में यह योजना विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त, 2021 से लागू होगी।



सामुदायिक वन अधिकार विकास योजना के संबंध में जारी गाइडलाईन