वन धन विकास योजना

जनजाति समुदाय द्वारा वन क्षेत्र में पैदा होने वाली लघु वन, कृषि, औषधीय तथा उद्यानिकी उपजों एवं अन्य उत्पादों का संग्रहण कर उनका मूल्य संवर्धन के द्वारा उचित मूल्य दिलवाये जाने के उद्धेश्य से जनजाति कार्य मंत्रालय भारत सरकार तथा ट्राईफेड के माध्यम से वन धन विकास कार्यक्रम वर्ष 2018-2019 में सम्पूर्ण भारत में लागू किया गया है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत ट्राईफेड राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष सहकारी संस्था तथा जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग नोडल विभाग के रूप में एवं राजससंघ राज्य स्तरीय कार्यकारी संस्था के रूप में कार्यरत है। जिला स्तर पर इस योजना के सफल क्रियान्वयन हेतु सम्बन्धित जिला कलेक्टरों की मुख्य भूमिका है।
 
जनजाति समुदाय के निवास स्थान के निकटस्थ प्रारम्भ किये जाने वाले 300 सदस्यीय वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर का गठन औसतन 20 सदस्यों के 15 स्वंय सहायता समूहों के माध्यम से किया जावेगा। जिसमें जनजाति समुदाय से न्यूनतम 60 प्रतिशत सदस्य होना आवश्यक है।
 
एक वन धन केन्द्र क्लस्टर के लिए प्रति इकाई प्रशिक्षण, प्रचार-प्रसार तथा टूलकिट इत्यादि क्रय के लिये ट्राईफेड के माध्यम से कुल 15.00 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है।
 
वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर गठन के लिए की गई कार्यवाहीः-
योजना के प्रारम्भ में राज्य जनजाति उपयोजना तथा सहरिया क्षेत्र में कुल 27 वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इसी प्रकार योजना के द्वितीय चरण के लिए प्रमुख शासन सचिव जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग द्वारा योजना का नवीन ड्राफ्ट तैयार कर जनजाति उपयोजना, सहरिया तथा माडा क्षेत्र के कोटा एवं बारां जिले में नवीन वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर के गठन किये जाने के लिये दिनांक 22.12.2020 को वेबीनार के माध्यम से राज्य के 8 जिलों यथा उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ सिरोही, बांरा, कोटा एवं झालावाड़ के जिला कलक्टरों, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद, टी.ए.डी. विभाग के अधिकारियों तथा राजीविका एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई तथा लगभग 555 नवीन वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर के गठन के लक्ष्य निर्धारित करते हुए कार्यकारी योजना से अवगत कराया गया। बैठक में ट्राईफेड, भारत सरकार के माध्यम से संचालित वन धन विकास योजनान्तर्गत वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर के गठन हेतु आवश्यक निर्देश प्रदान किये गये तथा टाईमलाईन जारी की गई।
 
योजना के प्रथम चरण में जनजाति उपयोजना क्षेत्र में पूर्व गठित 27 वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर में से 6 वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर कार्यशील हो चुके है। इनके द्वारा विभिन्न लघु वन उपजों, कृषि उत्पादों तथा आयुर्वेदिक औषधियों का संग्रहण, मूल्य संवर्धन, पैकिंग तथा विपणन की कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है। राजीविका के माध्यम से संचालित वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर मगवास द्वारा लगभग 75 क्विंटल हर्बल गुलाल निर्मित की जाकर होली के अवसर पर विपणन किया गया है तथा शेष वन धन विकास केन्द्रों को कार्यशील किये जाने की कार्यवाही प्रगति पर है।
 
माननीय मुख्य मंत्री महोदय द्वारा की गयी घोषणा के अन्तर्गत जनजाति उपयोजना सहरिया व माडा क्षेत्र क्षेत्र के 45 हजार जनजाति परिवारों को उनके द्वारा संग्रहित लघु वन उपजों का मूल्य संवर्धन कर मार्केटिंग के बेहतर अवसर सृजित करने के लिए 150 वन धन केन्द्र क्लस्टर का गठन किये जाने हेतु 22 करोड़ 50 लाख रूपये व्यय किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किये गये थे। इसके विरूद्ध राजस संघ के सहयोग से अबतक 49 हजार परिवारों को उनके द्वारा संग्रहित लघु वन उपजों का मूल्य संवर्धन कर मार्केटिंग के बेहतर अवसर सृजित करने के क्रम में 162 वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर के गठन पश्चात् ट्राईफेड, नई दिल्ली द्वारा प्रेषित प्रस्ताव स्वीकृत करते हुए 162 वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर के गठन हेतु राशि 24 करोड़ 30 लाख रू. की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। जिनमें उदयपुर जिले में 64, बांसवाड़ा जिले में 40, डूंगरपुर जिले में 35 तथा प्रतापगढ़ जिले में 23 वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर सम्मिलित है।

 

वन धन विकास योजना की विस्तृत जानकारी
योजना का नवीन ड्राफ्ट
वन धन विकास केन्द्र क्लस्टर मगवास द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल का विडियो