जनजाति भागीदारी योजना

राजस्थान में रहने वाले जनजाति समुदाय के उन्नयन हेतु सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन प्रयासों में भागीदारी बढ़ाने के लिए जनजाति भागीदारी योजना वर्ष 2021-22 से प्रारंभ की जा रही है। वर्ष 2021-22 हेतु जनजाति भागीदारी योजना में 1000.00 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है।

इस योजना के तहत विभिन्न प्रकार के कार्य एवं गतिविधियां जनजाति समुदाय की आवश्यकता के अनुरूप करवाए जा सकेंगे। योजना के तहत आवश्यक सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण एवं मरम्मत, संवर्द्धन, संरक्षण के साथ रोजगार सृजन, कौशल प्रशिक्षण, कृषि, उद्यानिकी, डेयरी, पशुपालन इत्यादि के क्षेत्र में भी कार्य करवाए जा सकेंगे। उदाहरण के तौर पर विद्यालयों, छात्रावासों, चिकित्सा केन्द्रों, आंगनबाडी केन्द्रों, मां-बाडी केन्द्रों, सड़क, पुलिया, जल संग्रहण ढांचों/एनीकटों, पेयजल योजनाओं, सामुदायिक शौचालयों, बस स्टैंड इत्यादि के निर्माण एवं मरम्मत, बल्क कूलर की स्थापना, हैचरी प्लांट, विभिन्न प्रकार की कोचिंग एवं प्रशिक्षण इत्यादि के कार्य योजना के तहत करवाये जा सकेंगे। योजना के तहत वे कार्य ही अनुमत होगे जिनके माध्यम से लाभान्वित होने वाली जनसंख्या कम से कम 50 प्रतिशत भाग जनजाति समुदाय का हो।

योजना के तहत निजी भूमि पर निर्माण अनुमत नहीं होगे एवं साथ ही भूमि/अधिग्रहण के पेटे मुआवजा भुगतान, धार्मिक स्थलों का निर्माण, जातिगत या धार्मिक आधार पर सामुदायिक भवनों का निर्माण अनुमत नहीं होगा। योजना के तहत आव्रत्ति व्यय पर कोई राशि स्वीकृत नहीं की जा सकेगी।

जनजाति भागीदारी योजना के अन्तर्गत जनजाति क्षेत्र में आधारभूत विकास से सम्बंधित कार्यो में जनसहयोग, कम्पनियों के सी.एस.आर. कोष, सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास योजना, केन्द्र एवं राज्य सरकार की अन्य योजनाओं से न्यूनतम 30 प्रतिशत राशि का योगदान प्राप्त कर शेष राशि जनजाति भागीदारी योजना से स्वीकृत कर विकास कार्य करवाये जायेगे।


जनजाति भागीदारी योजना के संबंध में जारी गाइडलाईन