सफलता की कहानियां

Success Stories (मत्स्य बीज पालन पायलट प्रोजेक्टः एक सफल वृतान्त)

मछली पालन हेतु पर्याप्त मात्रा में उचित किस्म के मत्स्य बीज की समय पर प्रतिवर्ष उपलब्धता एक महत्वपूर्ण कारक है। एक आंकलन के अनुसार उपयोजना क्षेत्र के सभी जलाशयों में मछली पालन के लिये प्रतिवर्ष लगभग 4.5 करोड आंगुलिक स्तर के मत्स्य बीज की मांग है। जिसके विरूद्ध सभी स्त्रोतों से लगभग 1.5 करोड मत्स्य बीज ही उपलब्ध हो पाता है। शेष लगभग 3 करोड आंगुलिक मत्स्य बीज की अनुपलब्धता के कारण वर्तमान में मछली पालन हेतु उपयोग मंें लिये जा रहे जल क्षेत्र की तुलना में तीन गुना अधिक क्षेत्र में मछली पालन का कार्य नहीं किया जा रहा है।
राजससंघ द्वारा संचालित समेकित मत्स्य विकास परियोजना हेतु प्रतिवर्ष क्रय मत्स्य बीज का लगभग 30 से 40 प्रतिशत अन्य बाहरी एजेन्सी यथा मात्स्यकी महाविद्यालय उदयपुर, मत्स्य विभाग राजस्थान अथवा जीएफसीसीए गुजरात से पूर्ति की जाती है।

राजससंघ के पास मत्स्य बीज उत्पादन हेतु जयसमन्द पर हेचरी उपलब्ध है। उक्त हेचरी की स्पान उत्पादन क्षमता लगभग 3 से 5 करोड है। जबकि स्पान पालन की क्षमता मात्र 80 लाख ही है। अतः संघ के हेचरी के पूर्ण उपयोग व क्षेत्र की मत्स्य बीज की मांग को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष मत्स्य बीज पालन पायलट प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन किया गया।

प्रोजेक्ट के अन्तर्गत कुल राशि रूपये 20.00 लाख से कुल दो हेक्टर भूमि पर चार मत्स्य बीज उत्पादन केन्द्र स्थापित करने एवं चार लाभान्वितों के लक्ष्य के विरूद्ध 2.0 हेक्टर भूमि पर चार मत्स्य बीज उत्पादन केन्द्र की स्थापना कर गत दो वर्षो से मत्स्य बीज पालन का कार्य सफलतापूर्वक किया गया।

योजना अन्तर्गत उदयपुर जिले के अम्बाला गांव (चावण्ड) के श्री मोहनलाल मीणा, बांसवाडा जिले के गढ़ी तहसील मंे सांगेला गांव (जौलाना) के श्री कान्तिलाल डामोर, गांव भूदानपुरा के श्री ताराचन्द खराडी एवं गांव भीमसौर के श्री दिनेशचन्द मीणा की भूमि मत्स्य बीज पालन हेतु उपयुक्त पाये जाने पर चयन किया गया। इन चयनित लाभान्वितों को गुजरात राज्य के अंकलेश्वर एवं आस-पास स्थित सफल मत्स्य बीज उत्पादन केन्द्रों का क्षेत्रीय भ्रमण कराया गया। तद्उपरान्त 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाकर प्रत्येक चयनित लाभार्थियों की भूमि पर 0.5 हेक्टर क्षेत्र में तीन मत्स्य बीज पालन पोण्ड का निर्माण राशि रूपये 2.70 लाख कराया गया। इसके अतिरिक्त लाभान्वितों की मांग के अनुरूप टयूबवैल एवं मोटर उपलब्ध कराये गये। निर्माण पश्चात इन पोण्डों में पानी भरा जाकर बीज पालन हेतु तैयार किया गया। 

योजना के प्रावधान अनुरूप प्रथम वर्ष शत प्रतिशत अनुदान पर तीनों लाभान्वितों को पालन हेतु कुल 45.5 लाख स्पान राशि रूपये 0.92 लाख का उपलब्ध कराया गया जिसे पालन पश्चात 9.52 लाख फ्राई, 0.74 लाख एडवान्स फ्राई एवं 0.86 लाख आंगुलिकों की प्राप्ति ली जाकर बांसवाडा, डूंगरपुर एवं उदयपुर जिले के 18 जलाशयों में संचित किया गया।

इसके साथ ही द्वितीय वर्ष इन निर्मित चारों मत्स्य बीज पालन स्थल हेतु 86.5 लाख स्पान राशि रूपये 2.14 लाख उपलब्ध कराया गया जिसे पालन पश्चात् लाभान्वित स्वयं के स्तर पर बीज बिक्री के अतिरिक्त 0.50 लाख फ्राई 1.30 लाख एडवान्स फ्राई एवं 4.18 लाख आंगुलिक राशि रूपये 2.20 लाख की प्राप्ति होकर बांसवाडा, डुंगरपुर, उदयपुर के 18 जलाशयों के 200 लाभान्वितों को उपलब्ध कराया गया। 

चालू वर्ष 2014-2015 के दौरान इन चारों पालन स्थल हेतु कुल 36.00 लाख स्पान जिसकी राशि रूपये 0.99 लाख पालन हेतु उपलब्ध करवा दिया गया है। वर्तमान में पालन कार्य जारी है। इसके फलस्वरूप जहां एक ओर चारों लाभान्वितों को अपनी निजी आमदनी के साथ योजना प्रारम्भ से अब तक राशि रूपये 3.94 लाख रूपये की अतिरिक्त आमदनी हुई है वहीं 36 जलाशयों के 400 लाभान्वितों को मछली पालन हेतु समय पर मत्स्य बीज भी उपलब्ध हो पाया है। 

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2013-2014 में तीन नये अतिरिक्त मत्स्य बीज पालन केन्द्रों का निर्माण हेतु प्रस्तावित राशि रूपये 30.00 लाख की स्वीकृति जारी हो चुकी है। प्रस्ताव अनुरूप तीन नयें मत्स्य बीज केन्द्रों की स्थापना चालू वर्ष 2014-2015 के दौरान पूर्ण कर लिया जावेगा।
राजस संघ के पास अपनंे उद्धेश्य की पूर्ति हेतु 1500.00 लाख की अधिकृत पूंजी के विपरीत 1498.14 लाख की प्रदत्त हिस्सा पूंजी है। अपनी पूंजी के अतिरिक्त राजस संघ को विशेष केन्द्रीय सहायता मद तथा केन्द्रीय प्रवर्तित योजना के अन्तर्गत भी सहायता प्राप्त होती हे।