विभागीय योजनाऐं

1. मत्स्य योजनाऐं - 

  •  नवीन मत्स्य सहकारी समितियों का गठन -  जनजाति उपयोजना क्षेत्र में राजससंघ द्वारा अब तक 104 नवीन मत्स्याखेट सहकारी समितियों के गठन किया जाकर इसमें लगभग 3224 जनजाति युवक-युवतियों को जोड़ा गया है। 
  • मत्स्य बीज (स्पान) उत्पादन, एवं विभिन्न तालाबों में संचय - मत्स्य बीज उत्पादन फार्म जयसमन्द पर मत्स्य बीज क्षमता बढाये जाने के लिए एक नवीन पोण्ड का निर्माण कार्य करवाया जाकर वर्ष 2017-18 में 163.50 लाख बीज (स्पान) का उत्पादन कराया जाकर चयनित 4 विकेन्द्रीकृत मत्स्य बीज पालन नर्सरियों/ग्रामीण क्षेत्र मौसमी तलाईयों में संचय किया गया तथा 140 स्थानीय जनजाति मत्स्य बीज पालकों को लाभान्वित किया गया। 
  • मत्स्य प्रशिक्षण कार्य- मत्स्य विकास कार्यक्रम (विशेष केन्द्रीय सहायता योजना के तहत) कुल 458 जनजाति मत्स्य पालकों को विभिन्न विधि से  मत्स्याखेट किए जाने का प्रशिक्षण दिये जाने के लक्ष्यों के विरूद्ध अब तक 376 लाभान्वितों को मत्स्य बीज पालन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कार्य प्रगति पर है।
  • समेकित मत्स्य विकास परियोजना:- राजससंघ द्वारा   वर्ष 2006-07 से उपयोजना क्षेत्र में समेकित मत्स्य विकास परियोजना के अन्तर्गत छोटे जलाशयों में मछली पालन के माध्यम से स्थानीय जनजाति परिवारों को रोजगार का अतिरिक्त साधन उनके घर के समीप उपलब्ध कराया जा रहा है। योजनान्तर्गत अब तक कुल 175 जलाशयों के 1945 हेक्टर जल क्षेत्र में मछली पालन का कार्य कराया जाकर 1646 स्थानीय जनजाति परिवार को जोड़ा गया है।   है। योजनान्तर्गत वर्ष 2017-18 में 40 जलाशयों के 486 जनजाति लाभान्वितों को 14.45 लाख मत्स्य आंगुलिक बीज उपलब्ध कराया जाकर लाभान्वित किया जा चुका है। 
  • जनजाति उपयोजना क्षेत्र में मत्स्य गतिविधि को बढावा दिए जाने के लिए राजससंघ द्वारा भारत सरकार से विशेष केन्द्रीय सहायता मद में मत्स्य विकास कार्यक्रम के लिए स्वीकृत राशि रूपये 10.00 करोड़ के अन्तर्गत निम्नानुसार व्यय की जा है -

 

  1. हेचरी विकास एवं सुदृढीकरण अन्तर्गत महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर की हेचरी विकास हेतु राशि रूपये 112.00 लाख उपलब्ध कराया जा चुका है। कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है एवं निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। 
  2. जनजाति उपयोजना क्षेत्र में राजससंघ की जयसमन्द स्थित मत्स्य हैचरी पर मत्स्य बीज उत्पादन बढाये जाने के लिए नवीन दो बड़े मत्स्य पोण्ड निर्माण एवं हैचरी शेड निर्माण इत्यादि के लिए राशि रू. 54.82 लाख के पूर्ण कराया जाकर मत्स्य बीज पालन कार्य हेतु उपयोग में लिया जा रहा है। 
  3. विकेन्द्रीत मत्स्य बीज पालन नर्सरी स्थापना कार्य के तहत 23 मत्स्य बीज पालन स्थल चिन्हित किये जाकर पांच नर्सरियों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। जिस पर राशि रूपये 7.50 लाख व्यय किये जा चुके है। 45 नर्सरियों  के लिए राशि रू. 296.20 लाख का निर्माण कार्य हेतु क्षेत्र के स्थानीय जनजातियों से कार्य प्रस्ताव आमंत्रित किये गये है।
  4. जयसमन्द मत्स्य बीज फार्म पर एक मत्स्य बीज प्रशिक्षण भवन निर्माण राशि रूपये 84.81 लाख, 20 फिश हेण्डलिंग शेड निर्माण राशि रूपये 82.45 लाख तथा  4 खुदरा मछली बिक्री दुकान निर्माण राशि रूपये 20.37 लाख, 13 खुदरा मछली बिक्री बूथ निर्माण राशि रूपये 20.26 लाख, के निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके है। जयसमन्द मत्स्य बीज फार्म पर हैचरी शेड आधुनिकीकरण का कार्य राशि रू. 4.31 लाख तथा भवन मरम्मत कार्य पर राशि रू.  13.26 लाख किया जाकर निर्माण कार्य प्रगति पर है।

 

2. जनजाति स्वरोजगार योजना -

जनजाति बैरोजगार युवक/युवतियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2001-02 में जनजाति स्वरोजगार योजना राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत कर राजस्थान जनजाति क्षै़त्रीय विकास सहकारी संघ लि0 उदयपुर के माध्यम से 5 जिलों उपयोजना क्षेत्र में प्रारम्भ की गई है। योजना के अन्तर्गत लाभार्थी को उद्योेग/सेवा/व्यवसाय हेतु योजना में सम्मिलित इकाईयों के लिए आर्थिक सहायता बैंक ऋण के रूप में प्रदान कराई जावेगी, जिसमें इकाई लागत का 50 प्रतिशत अथवा 10,000/- रू0 जो भी कम हो अनुदान देने का प्रावधान है।

वर्ष 2016-17  में 1900 बेरोजगार जनजाति युवक/युवतियों को लाभान्वित किए जाने के लक्ष्य के विरूद्ध 1258 को लाभान्वित किया जा चुका है।  अब तक 1827 युवक-युवतियों को लाभान्वित किया जा चुका है। कार्य प्रगति पर है।

 

3. विशेष केन्द्रीय सहायता मद अन्तर्गत बीज मिनीकिट्स वितरण -

उपयोजना क्षेत्र में निवास करने वाले जनजाति के बी.पी.एल. कृषको को कृषि विभाग के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2017-18 में खरीफ फसल में कपास, उड़द, सोयाबीन के 84450 एवं रबी फसल में चना एवं गैहूं के 40800 मिनीकिट्स जिनका कुल मूल्य लगभग 7.74 करोड़ का निःशुल्क वितरण कर 125250 जनजाति कृषकों को लाभान्वित किया गया है।

 

4. सीताफल एवं लघु वन उपज संग्रहण तथा विपणन -

जनजाति लघु वन उपज संग्रहणकर्ताओं में से कोटडा क्षेत्र की ग्रामीण वन सुरक्षा एवं प्रबन्धकीय समितियों के सीताफल संग्रहणकर्ताओं को वन विभाग के माध्यम से उपज भण्डारण के लिए प्रथमतः 300 क्रेट निःशुल्क वितरित किये गये एवं उदयपुर भीलवाडा इत्यादि बाजारों में सीधे विपणन हेतु संग्रहणकर्ताओं को निःशुल्क परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई गई। सीताफल सहित लघु वन उपजों के सग्रहण के लिए जनजाति लघु वन उपजों के संग्रहणकर्ताओं को 4780 प्लास्टिक क्रेट वितरण किए जान के लक्ष्यों के विरूद्ध अब तक 3044 क्रेटस का वितरण किया जा चुका है। वितरण कार्य प्रगति पर है।