उपलब्धियां

विभागीय योजना

 

जनजाति स्वरोजगार योजना

वर्ष 2001-02 में जनजाति के बैरोजगार युवक /युवतियों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनजाति स्वरोजगार योजना राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत कर राजस्थान जनजाति क्षै़त्रीय विकास सहकारी संघ लि0 उदयपुर के माध्यम से 5 जिलों यथा- उदयपुर,डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ एवं सिरोही(आबूरोड) में प्रारम्भ की गई है।

योजना के अन्तर्गत लाभार्थी को उद्योेग/सेवा/ व्यवसाय हेतु योजना में सम्मिलित इकाईयों के लिए आर्थिक सहायता बैंक ऋण के रूप में प्रदान कराई जावेगी, जिसमें इकाई लागत का 50प्रतिशत अथवा 10,000/-रू0 जो भी कम हो अनुदान देने का प्रावधान है।

राजस संघ द्वारा इस योजना में मुख्य रूप से खादी ग्रामोद्योग सेवा, छोटे व्यवसाय सम्मिलित किये है उनमें सिलाई कार्य, सीमेन्ट जाली निर्माण, चर्म कार्य, लौहारी कार्य, बूट पालिश,रेडीमेड गारमेन्ट, फल-सब्जी की दुकान,बैलगाडी,मनिहारी, बिजली के सामान की दुकान, मैकेनिक शोप, साईकिल दुकान, रेडियो/ टी.वी. सेवा केन्द्र, आटा चक्की, ड्र्ाईक्लीन की दुकान, फर्श की घिसाई, सफेद मूसली उत्पादन आदि सम्म्लिित है। गत तीन वर्षो तथा वर्ष 2013-14(मार्च,2014 तक) की प्रगति का विवरण निम्नानुसार है।
वर्ष उपलब्धि
लाभान्वितों की संख्या व्यय राशि
2010-11 997 99.70
2011-12 514 51.40
2012-13 2094 209.14
2013-14 3786 378.60
 

मत्स्य बीज पालन पायलट प्रोजेक्ट, राशि रूपये 20.00 लाख( वि.के.स.)

मत्स्य बीज वितरण 2015-2016

राजस्व संग द्वारा जनजाती उपयोजना क्षेत्र के विभिन्न जालाशायो मे वित्तीय वर्ष २०१५-१६ मे निम्नानुसार मतस्य बीज का संचालन किया गाय हें

 

वर्ष 2013-14 में वि.के.स. मद से जनजाति उपयोजना क्षेत्र में बी.पी.एल. जनजाति कृषकों को निःशुल्क सिंगल सूपरफास्फेट (दानेदार) खाद के वितरण-

वर्ष 2013-14 में विशेष केन्द्रीय सहायता मद से जनजाति उपयोजना क्षेत्र में बी.पी.एल. जनजाति कृषकों को निःशुल्क सिंगल सुपरफास्फेट (दानेदार) खाद के वितरण का कार्य प्रारम्भ करते हुए संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग,उदयपुर से लेम्पसवाईज प्राप्त मांग के अनुसार जनजाति उपयोजना क्षेत्र के जिले उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ सिरोही(आबूरोड) में राजससंघ द्वारा लगभग 17832.25 मे.टन. एस.एस.पी.(दानेदार) वितरण करते हुए लगभग 356645 जनजाति बी.पी.एल. कृषकों को लाभान्वित किया गया है।

 

समेकित मत्स्य विकास परियोजनाः प्रगति प्रतिवेदन

राजससंघ द्वारा उपयोजना क्षेत्र के बांसवाड़ा, डूंगरपुर एवं उदयपुर जिलों में समेकित मत्स्य विकास परियोजना के अन्तर्गत छोटे जलाशयों में मछली पालन के माध्यम से स्थानीय जनजाति परिवारों को रोजगार का अतिरिक्त साधन उनके घर के समीप उपलब्ध कराया जा रहा है। उक्त योजना बांसवाड़ा जिले में वर्ष 2006-2007 व डूंगरपुर तथा उदयपुर जिलों में 2008-2009 से संचालित की जा रही है। योजना का क्रियान्वयन समेकित आधार पर किया जा रहा है, जिसमें जलाशय का सर्वेक्षण, चयन एवं आवंटन, लाभान्वितों का चयन, प्रशिक्षण, मत्स्य बीज संग्रहण, नाव जाल उपलब्ध कराना, मत्स्य विपणन हेतु साईकिल मय बाॅक्स, लाभान्वितों को आखेट एवं विपणन में तकनीकी सहायता इत्यादि कार्य सम्मिलित है। योजनान्तर्गत वर्ष 2013-14 (मार्च,2014 तक) तक राशि रूपये 18.90 लाख रूपये व्यय किये जा चुके है।